पद पर रहते हुए ऐसा करने वाले पहले मुख्यमंत्री

डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के इतिहास में पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल (पद पर रहते हुए) के दौरान भोजशाला परिसर के अंदर जाकर आधिकारिक तौर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और यज्ञ में आहुति दी।
हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद का घटनाक्रम हाल ही में 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाया था, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इस परिसर को मंदिर (वाग्देवी मंदिर) के रूप में मान्यता दी गई थी। कोर्ट के इसी फैसले के बाद हिंदू पक्ष को यहाँ नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार मिला, जिसके ठीक बाद मुख्यमंत्री का यह दौरा हुआ है।
दोपहर करीब 1:30 बजे मुख्यमंत्री भोजशाला परिसर पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।
उन्होंने मां वाग्देवी के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर आरती की और प्रदेश की जनता की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने वहां बने हवन कुंड में आहुति भी दी।
शार्ट में कहें तो, हाई कोर्ट के फैसले के बाद सरकार की तरफ से इसे एक बड़े सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बदलाव के उत्सव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री ने खुद शामिल होकर इस पूजा की शुरुआत की है।
