भैरुंदा। नगर के मिलन गार्डन में अग्रवाल महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय भव्य शिव महापुराण कथा का मंगलवार को भक्तिमय वातावरण में विराम हुआ। कथा के अंतिम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान शिव की कथा का श्रवण कर धर्मलाभ लिया। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए आयोजन समिति को अतिरिक्त पंडाल लगाकर बैठक व्यवस्था करनी पड़ी।

कथा के समापन के बाद श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का वितरण किया गया।पांच दिवसीय शिव महापुराण के दौरान नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए पहुंचे। सावन मास में आयोजित इस धार्मिक आयोजन को क्षेत्रवासियों ने ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति पहले देखने को नहीं मिली। पूरे कथा परिसर में लगातार भक्तिमय वातावरण बना रहा।शिव भक्ति से मिलती है मानसिक शांति और आंतरिक शक्ति-पंडित राघव मिश्राविराम दिवस पर कथा व्यास पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव की भक्ति व्यक्ति को मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और जीवन में सकारात्मकता प्रदान करती है। शिव आराधना का मार्ग मनुष्य को मोह-माया, भ्रम और भटकाव से मुक्त कर जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की कथा मानव जीवन को सुख, समृद्धि और आनंद प्रदान करने वाली है, क्योंकि भगवान शिव स्वयं कल्याण और सुख के मूल स्रोत हैं। वे संपूर्ण विद्याओं के ईश्वर, समस्त भूतों के अधीश्वर, ब्रह्मविद्या के अधिपति और साक्षात परमात्मा के स्वरूप हैं। कथा के अंतिम दिवस पंडित राघव मिश्रा ने भगवान शिव और माता पार्वती की महिमा का वर्णन करते हुए शिव शक्ति के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी शिव और शक्ति की उपासना मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में नई दिशा प्रदान करती है।ज्योतिर्लिंगों की महिमा का किया वर्णनकथा के अंतिम दिन पंडित राघव मिश्रा ने भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति, धार्मिक महत्व और महिमा के बारे में श्रद्धालुओं को बताया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव स्वयं महाकाल हैं, जिनका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। वे त्रिकालदर्शी हैं और भूत, वर्तमान एवं भविष्य के ज्ञाता माने जाते हैं। पृथ्वी पर भगवान शिव विभिन्न स्थानों पर ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देश के विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं। इनके दर्शन एवं स्मरण से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है और मनोकामना पूर्ति की कामना की जाती है। प्रतिदिन द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नामों का स्मरण और जाप करने से मनुष्य को कष्टों से मुक्ति तथा आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। शिव पुराण की मान्यता के अनुसार भगवान शिव लोक कल्याण के लिए लिंग स्वरूप में विराजमान हैं और भगवान शिव के बारह प्रमुख विग्रहों को द्वादश ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।भोलेनाथ सरल स्वभाव के देवता हैंकथा व्यास ने कहा कि भगवान शिव को महाकाल, त्रिकालदर्शी और कल्याणकारी देव के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की आराधना से मनुष्य के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उसे मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है। भगवान शिव को भोलेनाथ इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और सरल भाव से प्रसन्न हो जाते हैं।महाप्रसादी में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़पांच दिवसीय शिव महापुराण के विराम अवसर पर कथा के बाद महाप्रसादी का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन समिति के सदस्यों एवं सेवादारों ने पूरी व्यवस्था संभाली। अग्रवाल महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन के सफल समापन पर श्रद्धालुओं ने आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। महिला मंडल की ओर से भी सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और सेवा कार्य में जुटे सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया।

