सलधा – बेमेतरा जिला के ग्राम सलधा जहां सवा लाख शिवलिंग का ऐतिहासिक मंदिर बन रहा है वहीं उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का दिव्य भव्य चातुर्मास चल रहा है। सर्व प्रथम समस्त ग्रामवासी सलधा भरत शुक्ला, डिप्टी कलेक्टर सुकमा सुभाष शुक्ला संदीप शुक्ला सपरिवार के द्वारा पादुका पूजन किया गया।
दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने सलधा शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नाम की घोषणा की। अप्रमेय स्वामी जी ने विरुदावली का वाचन किया।
अपने सत्संग सत्र में परम पूज्य शंकराचार्य जी कहते हैं कि हम होग जयघोष करते हुए कहते हैं कि हर हर महादेव इसका क्या अर्थ है हर शब्द हृ हरणे धातु से बना है जिसका अर्थ है हरण करना जो हमारे दुखों का हरण करे जो हमारे पापों का हरण करे वो हर हैं। समाज में जो चोरी करता है हमारे धन का वस्त्र का हरण करता है उसकी निन्दा होती है। पर भगवान श्री शिव जी की प्रसंशा करते हैं क्योंकि वे हमारे पापों का, चिंताओं का, दुखों का हरण करते हैं। दो बार हर हर क्यों कहते हैं जब हम दुःखी होते हैं आतुरता, त्वरा होती है तब दो बार बोलते हैं । शास्त्र की भी आज्ञा है इसलिए भी दो बार बोलते हैं। महादेव में देव का अर्थ है जो दे जिनकी देने की आदत है वे देवता हैं। देवता बहुत से हैं मगर भगवान शिव जी को महादेव कहते हैं क्योंकि जो अपने आप को संकट में डालकर सबकी रक्षा करे वो महादेव हैं। जो देते समय पात्रता और मात्र से अधिक दे दे वो महादेव हैं।
सबसे पहले हर हर महादेव किसने कहा?
जब भगवान शिव जी समाधि लगा लिये थे उसी समय तारकासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा कि मैं भगवान शिव जी के पुत्र से ही मारा जाऊं। देवता पराजित हो गये माता पार्वती जी का अवतार है गया था देवराज इन्द्र ने कामदेव को भगवान की समाधि भंग करने के लिए भेजा तब कामदेव ने सोंचा कि यदि शिव जी नाराज हो गए तो मुझे भस्म कर देंगे। तब पहली बार कामदेव ने हर हर महादेव कहा पहली बार हर कहा कि मेरे दुखों को हर लो दूसरी बार हर का अर्थ है कि देवताओं के दुःखों को दूर करें। वेद वित् ज्ञाने धातु से बना है जिसका अर्थ है जानना जो परम सत्य का ज्ञान करा दे वेद हैं। अन्य धातुओं से निष्पन्न अर्थ है जो पुरुषार्थों का लाभ करा दे वेद हैं। जो परम सत्ता का बोध कराये वो वेद हैं। जो ब्रह्म विचार कराये वो वेद हैं। हर व्यक्ति ये चाहता है कि सदा के लिए सुख मिले और दुःखों का सदा सदा के लिए अंत हो जाय। वेदों में जो ब्रह्मज्ञान है यदि श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर लिया जाय तो दुःखों की आत्यंतिक निवृत्ति और परमानंद मोक्ष की प्राप्ति हो जायेगी। वेद अपौरुषेय हैं। अंतिम सत्य हैं वेदों में एक भी मात्रा निरर्थक अनुपयोगी नहीं है।
प्रतिदिन 5 बार पूजन करते हैं सुबह 4.30 , 6.45, 9.45, 4.45 और शाम को 6.45 बजे। सुबह 8 से 9 वेदांत पाठ शाम को 2.30 से सत्संग प्रवचन होता है।
बहुत अधिक संख्या में भक्तों के द्वारा प्रवचन का लाभ लिया गया। सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर आरती की।
घनश्याम आदिवासी ने भजन सुनाया डिप्टी कलेक्टर सुकमा ने कहा कि यहां त्रिदेवों का दर्शन हो रहा है सलधा गांव के सभी पूर्वज आज तर गये हैं। रवि शास्त्री जी ने भी भजन सुनाया।
इस अवसर पर दंडी स्वामी उमेश आश्रम जी महाराज, सुरेंद्र आश्रम जी महाराज, वासुदेवाश्रम जी महाराज, छोटे आश्रम जी महाराज, शिवाश्रम जी महाराज, रामाश्रम जी महाराज, श्रीमज्ज्योतिर्मायनंद: सरस्वती जी महाराज, स्वामी श्री अप्रयय शिवसदातकृतानंद गिरी जी महाराज, ब्रह्मचारी शारदानंद, शंकर स्वरूप, प्रभु प्रभुतानंद, शंभु प्रेमानंद, ईश्वरानन्द, वैष्णवानंद, साधु सर्व शरण, आदि अनंतानन्द, बाबा धार्त धार्यानंद, मुक्तानंद, साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदाम्बा, आनंद उपधाध्य, रत्ना देवी उपाध्याय, वेद पाठी विद्यार्थीगण, श्रद्धालुगण सहित सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे ।

