कोरबा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में कोरबा जिले के करतला विकासखंड से कथित फर्जीवाड़े का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत कराईनारा के आश्रित ग्राम भेलवागुड़ी में हितग्राही गंगा राम पिता विशाल दास के नाम स्वीकृत आवास का निर्माण अधूरा होने के बावजूद किसी दूसरे आवास की तस्वीरें जियो टैग कर पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया। मामले ने योजना की निगरानी व्यवस्था और जनपद स्तर के निरीक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, सत्र 2024-25 में स्वीकृत इस आवास के लिए हितग्राही के खाते में प्रथम किश्त के रूप में 40 हजार रुपये, द्वितीय किश्त 55 हजार रुपये तथा तृतीय किश्त 25 हजार रुपये जमा किए गए। इसके अलावा मनरेगा के तहत मजदूरी मद में भी भुगतान दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में आवास पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि आरोप है कि मौके पर मकान अब भी अधूरा है और जियो टैग किसी अन्य हितग्राही के आवास का किया गया।
मामले को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि आवास मित्र, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव और जनपद स्तर पर निगरानी से जुड़े अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी जियो टैगिंग कर भुगतान कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं।

जनपद उपाध्यक्ष मनोज झा पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत करतला के उपाध्यक्ष मनोज झा की निगरानी पर भी खड़ा हो गया है। बताया जाता है कि वे लगातार प्रधानमंत्री आवास योजना के निरीक्षण का दावा करते रहे हैं, लेकिन उनके ही जनपद क्षेत्र में अधूरे आवास को पूर्ण दिखाकर भुगतान होने की भनक तक नहीं लग सकी। इसे लेकर क्षेत्र में चर्चा है कि यदि नियमित निरीक्षण हो रहा था तो इतनी बड़ी अनियमितता कैसे सामने आई। लोगों का कहना है कि यह स्थिति “दीपक तले अंधेरा” वाली कहावत को चरितार्थ करती है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, राशि की वसूली करने और योजना में हुई कथित अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

