भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंत्रालय (वल्लभ भवन) में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) के अंतर्गत संचालित विभिन्न जल योजनाओं और विकासात्मक कार्यों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री ने विभाग की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आमजन को शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके सहित विभाग के प्रमुख सचिव, प्रमुख अभियंता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
जल जीवन मिशन की समीक्षा और गुणवत्ता पर जोर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) के तहत प्रदेश में चल रही ग्रामीण नल-जल योजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:
- जल जीवन मिशन के तहत जिन गांवों में पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, वहाँ ‘हर घर जल’ का सत्यापन (Verification) सुचारू रूप से किया जाए।
- निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। सड़कों को खोदकर पाइपलाइन डालने के बाद, सड़कों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित की जाए ताकि आम जनता को असुविधा न हो।
गर्मी के मौसम में पेयजल आपूर्ति पर विशेष ध्यान
वर्तमान ग्रीष्मकाल को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि:
- प्रदेश के जिन क्षेत्रों में भूजल स्तर नीचे चला गया है या जल संकट की स्थिति बन रही है, वहाँ वैकल्पिक व्यवस्थाओं (जैसे टैंकरों के माध्यम से या नए नलकूप खनन) द्वारा पेयजल आपूर्ति निर्बाध रखी जाए।
- कंट्रोल रूम को सक्रिय रखा जाए ताकि नागरिकों की पेयजल से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निवारण हो सके।
अधूरी परियोजनाएं समय-सीमा में हों पूरी
मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि जो भी वृहद पेयजल परियोजनाएं (Mega Water Supply Projects) अपने तय समय से पीछे चल रही हैं, उनकी कड़ाई से मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कार्य में देरी करने वाली एजेंसियों और ठेकेदारों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पूरा कराने के निर्देश दिए।
जल स्रोतों के संरक्षण और तकनीकी नवाचार का आह्वान
बैठक में केवल पानी पहुंचाने पर ही नहीं, बल्कि जल स्रोतों को दीर्घकालिक रूप से जीवित रखने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि जल स्रोतों के पुनर्जीवन (Source Sustainability) के लिए ‘कचरा संग्रहण और जल संरक्षण’ अभियानों को इससे जोड़ा जाए। साथ ही, जल वितरण प्रणाली में पानी की बर्बादी और लीकेज को रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों (जैसे स्काडा सिस्टम) के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।
विभागीय तत्परता का आश्वासन: बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि विभाग मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी तत्परता से काम कर रहा है और सभी योजनाओं को तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएगा।
