नई दिल्ली, 17 मई 2026देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राष्ट्रपति ने केंद्रीय कैबिनेट के उस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव था। इस संबंध में ‘सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ जारी कर दिया गया है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पर इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि अब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़कर 37 हो गई है। सीजेआई (CJI) को मिलाकर अब सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या 38 हो जाएगी।
ऐतिहासिक फैसला: साल 2019 के बाद यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाई गई है। तब संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी।अधिनियम में बदलाव: इस नए बदलाव के लिए सरकार ने ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956’ की धारा 2 में संशोधन किया है।मामलों के निपटारे में तेजी: वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 92,000 से अधिक मामले लंबित हैं। जजों की संख्या बढ़ने से इन मुकदमों के निपटारे में बड़ी तेजी आएगी।
