सलधा/ बेमेतरा/ छत्तीसगढ़-जिला के ग्राम सलधा जहां सवा लाख शिवलिंग का ऐतिहासिक मंदिर बन रहा है वहीं उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का दिव्य भव्य चातुर्मास चल रहा है। सर्व प्रथम समस्त ग्रामवासी हड़गांव के द्वारा पादुका पूजन किया गया। दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने सलधा शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नाम की घोषणा की। अप्रमेय स्वामी जी ने विरुदावली का वाचन किया। परम पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि हमें तिराहे पर खड़ा किया गया है एक कर्म का मार्ग है दूसरा भक्ति का तरीका ज्ञान का। कर्म का जिसमें बहुत सावधानी से शास्त्रोक्त कर्म करना है सही विधान से किया गया तो स्वर्ग मिलेगा अशास्त्रीय किया तो नरक मिलेगा। दूसरा मार्ग भक्ति का है जिसमें हम भगवान की भक्ति करते हैं और भगवान जैसे जीवन चलायें वैसे चलते हैं। इसी में कामना वाली सकाम भक्ति है अपरा भक्ति जिसमें हम भगवान को साधन बना लेते हैं भगवान से मांगते हैं। ये भगवान को साधन समझते हैं। कुछ भक्त ऐसे हैं जो निष्काम प्रेम करते हैं भगवान से। कुछ नहीं मांगते केवल भगवान की प्रसन्नता चाहते हैं। ये परा भक्ति है निष्काम भक्ति जिससे भगवान मिल जाते हैं ये भगवान से भगवान को ही मांगते हैं भगवान साध्य हैं। गीता में चार प्रकार के भक्त का वर्णन है पहला आर्त, दूसरा जिज्ञासु तीसरा अर्थार्थी चौथा ज्ञानी भक्त। जो दुःख या संकट में अपनी रक्षा के लिए भगवान को याद करता है बुलाता है वो आर्त भक्त है जैसे गजेन्द्र ने ग्राह से बचने के लिए भगवान हरि को पुकारा जब हम केवल और केवल भगवान का भरोसा कर के भगवान् को बुलाते हैं तब भगवान आते हैं जैसे भगवान श्री हरि आये और गजेंद्र की रक्षा की। वैसे ही कौरव सभा में चीर हरण के समय द्रौपदी ने भगवान को पुकारा और भगवान साड़ी बनकर वस्त्रावतार लेकर आये और रक्षा की। भगवान् अनन्त जब साड़ी बनकर आ गये तब द्रौपदी के साड़ी का अंत कैसे होता। इसलिए सब कुछ छोड़कर भगवान के शरण में जाना चाहिए। जो संसार को छोड़कर भगवान को जानना चाहते हैं तो जिज्ञासु भक्त हैं परीक्षित जी। अर्थार्थी भक्त सुग्रीव है भगवान् ने इनकी पत्नी और राज्य दिला दिया। ध्रुव जी महाराज को राज्य की कामना थी भगवान की तपस्या की और भगवान ने अचल राज्य दिया। चौथा ज्ञानी भक्त हैं सभी भक्त भगवान को प्रिय हैं ज्ञानी विशेष प्रिय हैं। अज्ञानी भक्त केवल मूर्ति में भगवान देखता है और ज्ञानी भक्त सब में भगवान देखता है।
गुजरात से आयीं विदुषी गार्गी पंडित ने बहुत सुंदर हरिहर की चर्चा की। कवर्धा वाले पंडित आनंद उपाध्याय ने भजन सुनाया।
कलाकारों ने भजन और नृत्य प्रस्तुत किया।
परम पूज्य शंकराचार्य जी प्रतिदिन 5 बार पूजन करते हैं सुबह 4.30 , 6.45, 9.45, 4.45 और शाम को 6.45 बजे। सुबह 8 से 9.30 वेदांत पाठ होता है दोपहर को 2.30 से सत्संग प्रवचन होता है।
इस अवसर पर दंडी स्वामी उमेश आश्रम जी महाराज, सुरेंद्र आश्रम जी महाराज, वासुदेवाश्रम जी महाराज, छोटे आश्रम जी महाराज, शिवाश्रम जी महाराज, रामाश्रम जी महाराज, श्रीमज्ज्योतिर्मायनंद: सरस्वती जी महाराज, स्वामी श्री अप्रयय शिवसदातकृतानंद गिरी जी महाराज, ब्रह्मचारी शारदानंद, शंकर स्वरूप, प्रभु प्रभुतानंद, शंभु प्रेमानंद, ईश्वरानन्द, वैष्णवानंद, साधु सर्व शरण, आदि अनंतानन्द, बाबा धार्त धार्यानंद, मुक्तानंद, साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदाम्बा, आनंद उपधाध्य, रत्ना देवी उपाध्याय, रवि शास्त्री, प्रवीण गर्ग, अनुराग शर्मा, सनोज, संतोष मंडल, गौतम जैन, बलराम साहू, अश्वनी साहू, वेद पाठी विद्यार्थीगण, पुरुषोत्तम पटेल, घनश्याम आदिवासी, महेंद्र चौहान, राजेश वैष्णव सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बहुत अधिक संख्या में भक्तों के द्वारा प्रवचन का लाभ लिया गया। सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर आरती की।

