सलधा – बेमेतरा जिला के ग्राम सलधा जहां सवा लाख शिवलिंग का ऐतिहासिक मंदिर बन रहा है वहीं उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का दिव्य भव्य चातुर्मास चल रहा है। सर्व प्रथम समस्त ग्रामवासी रौद्रा के द्वारा पादुका पूजन किया गया। दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने सलधा शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नाम की घोषणा की। अप्रमेय स्वामी जी ने विरुदावली का वाचन किया। परम पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ का आदि त्योहार हरियाली है आप सभी को बहुत बहुत बधाई और आशीर्वाद यह त्योहार सबसे पहले माता पार्वती ने मनाया था इसी भगवान् श्री शिव जी के ऊपर बिल्वपत्र और हरी हरी पत्तियां समर्पित की थीं इसलिए हरियाली का त्योहार मनाया जाता है आज के दिन किसान और अन्य लोग अपने अपने यन्त्रों की पूजा करते हैं।
कल आपने सुना था कि भगवान श्री शिव जी की पुत्री अशोक सुंदरी ने राक्षस हुंड के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि मैं वहीं विवाह करुंगी जहां मेरे माता पिता ने तय किया है। मैं पतिव्रता हूं। तब हुंड ने नहुष के जन्म लेते ही उसका अपहरण कर लिया और रसोईया को बोला कि इसे पका कर कल देना मैं कल नाश्ता करुंगा। रसोईया बालक को अपनी पत्नी को दिया और हिरण के बच्चे का मांस बना दिया। इधर नहुष को वशिष्ठ जी आश्रम में पहुंचा दिया गया था जिसका नाम नहुष रखा गया जो घबड़ाये ना वो नहुष हैं। अशोक सुंदरी तपस्या कर रहीं थी। नहुष ने हुंड दैत्य का वध कर दिया और वशिष्ठ जी के आश्रम में अशोक सुंदरी, रंभा अप्सरा और नहुष आये और शुभ मुहूर्त में अशोक सुंदरी और नहुष का विवाह हो गया। और अपने माता पिता के पास आ गये और माता पिता प्रसन्न हो गये। इन्हीं नहुष को कुछ समय के लिए इंद्र बनाया गया था ऋषियों के श्राप से सर्प बन गये थे जो भगवान श्री कृष्ण की कृपा से मुक्त हूए और स्वर्ग छोड़कर शिव लोक गये। भद्रा भी भगवान शिव जी की कन्या है। विष की बूंद से पांच नाग कन्या उत्पन्न हुई थी ये भी भगवान शिव जी की पुत्री है। जलाधरी और शिवलिंग की स्थापना होती है उसी में पूरा शिव परिवार आता है।
दूर दूर से आए कलाकारों ने भजन और नृत्य प्रस्तुत किया।
परम पूज्य शंकराचार्य जी प्रतिदिन 5 बार पूजन करते हैं सुबह 4.30 , 6.45, 9.45, 4.45 और शाम को 6.45 बजे। सुबह 8 से 9.30 वेदांत पाठ होता है दोपहर को 2.30 से सत्संग प्रवचन होता है।
बहुत अधिक संख्या में भक्तों के द्वारा प्रवचन का लाभ लिया गया। सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर आरती की।

