‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान बना ग्रामीण विकास का मजबूत आधार, सिंचाई के साथ मत्स्य पालन से भी बढ़ेगी किसानों की आय
कोरबा, 22 जुलाई 2026। जिले में संचालित ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रहा है। अभियान के तहत विभिन्न ग्राम पंचायतों में निर्मित 336 आजीविका डबरियां वर्षा जल से पूरी तरह भर चुकी हैं। इन डबरियों के माध्यम से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने से खरीफ और रबी दोनों मौसम की फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है।
प्रत्येक आजीविका डबरी में लगभग 1,000 घनमीटर जल संचयन की क्षमता है। इस प्रकार जिले में कुल 3 लाख 36 हजार घनमीटर वर्षा जल का सफल संचयन किया गया है। इससे भू-जल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से खेती अधिक लाभकारी बनेगी।
आजीविका डबरियों का लाभ केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा। इन जलाशयों में मत्स्य पालन कर ग्रामीण किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। इससे कृषि के साथ-साथ वैकल्पिक रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
डबरियों की मेड़ों का भी बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया गया है। किसान यहां दलहन और तिलहन फसलों की खेती कर अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त करेंगे। इससे भूमि का अधिकतम उपयोग होगा और परिवारों की आमदनी में बढ़ोतरी के साथ पोषण सुरक्षा को भी बल मिलेगा।
जिले में तैयार की गई सभी आजीविका डबरियां अब ग्रामीणों के लिए बहुउद्देशीय संसाधन बन चुकी हैं। जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार, मत्स्य पालन और कृषि उत्पादन बढ़ाने जैसे कई लाभ एक साथ मिलने से यह योजना गांवों में आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
प्रशासन का मानना है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत विकसित यह मॉडल आने वाले समय में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ जल संरक्षण की संस्कृति को भी बढ़ावा देगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को नई गति मिलेगी और जिले का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।

