इस ऐतिहासिक कानून और विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े वक्तव्य की पूरी रिपोर्ट नीचे दी गई है:
🏛️ ऐतिहासिक जगदीशपुर से हुई शुरुआत और शरिया पर प्रहार
विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे प्रदेश के इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” बताया। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कुछ बेहद तीखे और बड़े बयान दिए
- शरिया के खिलाफ रुख: मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस जगदीशपुर की धरती का नाम बदलकर ‘इस्लामनगर’ किया गया था और शरिया कानून थोपा गया था, हमारी सरकार ने उसी धरती (कैबिनेट बैठक) से यूसीसी लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में अलग-अलग मजहबी तौल कांटा और शरिया नहीं, बल्कि सभी के लिए एक समान कानून होना चाहिए। [1, 2, 3]
- तुष्टिकरण पर हमला: सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष हमेशा से तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करता आया है। उन्होंने सदन में कहा, “राम से लेकर रहीम तक, सभी नागरिक अब एक समान न्याय और सुरक्षा के दायरे में आएंगे”।
📝 मध्य प्रदेश UCC कानून की 5 बड़ी बातें (क्या-क्या बदलेगा?)
मध्य प्रदेश का यह कानून मुख्य रूप से गुजरात और उत्तराखंड के यूसीसी मॉडल पर आधारित है, जिसके मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:
- एक से अधिक विवाह पर पूर्ण रोक: कानून लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में किसी भी नागरिक को (चाहे वह किसी भी धर्म का हो) एक से अधिक शादी करने की अनुमति नहीं होगी। बहुविवाह को कानूनी तौर पर अपराध माना जाएगा।
- कुप्रथाओं का अंत: राज्य में तीन तलाक और हलाला जैसी सामाजिक कुप्रथाओं पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।
- अनिवार्य विवाह पंजीकरण: शादी के बाद 60 दिनों के भीतर विवाह का सरकारी पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य होगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप और बच्चों के अधिकार: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। यदि लिव-इन रिलेशनशिप से कोई बच्चा पैदा होता है, तो उसे कानूनी दर्जा मिलेगा और माता-पिता की संपत्ति में बराबर का हक दिया जाएगा।
- आदिवासियों को बाहर रखा गया: मध्य प्रदेश की बड़ी जनजातीय आबादी की परंपराओं और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समाज (Scheduled Tribes) को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
📉 सदन में विपक्ष का हंगामा
विधेयक पेश होने के दौरान विधानसभा में भारी बवाल देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस विधायकों ने इस विधेयक को ‘सेलेक्ट कमेटी’ (प्रवर समिति) के पास भेजने की मांग की। कांग्रेस का आरोप था कि सरकार बुनियादी मुद्दों (जैसे महंगाई, बेरोजगारी) से ध्यान भटकाने के लिए इस विवादित बिल को जल्दबाजी में लाई है। विपक्ष के लगातार वॉकआउट और नारेबाजी के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक को ध्वनि मत (Voice Vote) से पास करा दिया।

