भोपाल। सांसद आलोक शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर तीखी बहस हो गई। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने मास्टर प्लान लागू नहीं होने पर बैठक की उपयोगिता पर सवाल उठाए। इसी दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। करीब दस मिनट तक बैठक का माहौल गर्म रहा, जिसके बाद दोनों कांग्रेस विधायक नाराज होकर बैठक से बाहर चले गए।
बैठक के दौरान कांग्रेस विधायकों ने कहा कि जब तक भोपाल का नया मास्टर प्लान लागू नहीं होता, तब तक विकास कार्यों की समीक्षा का कोई विशेष औचित्य नहीं है। इस दौरान हुई बहस में दोनों पक्षों के बीच तीखे संवाद हुए। सांसद आलोक शर्मा ने माहौल शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन विधायक अपनी नाराजगी जताते हुए बैठक से चले गए।

मास्टर प्लान जल्द लागू कराने मुख्यमंत्री से करेंगे चर्चा
बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल लगातार जनसंख्या और क्षेत्रफल दोनों दृष्टियों से विस्तार कर रहा है। ऐसे में शहर के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का शीघ्र लागू होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही भोपाल के जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू करने का आग्रह करेंगे।
अमृत-2 योजना के कार्यों की समीक्षा, अधिकारियों को फटकार
बैठक की शुरुआत अमृत-2 योजना के तहत केंद्र सरकार से प्राप्त 582 करोड़ रुपये की राशि से चल रहे पेयजल, सीवेज और जल संरक्षण कार्यों की समीक्षा से हुई। भाजपा विधायक भगवान दास सबनानी ने दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी मांगी, जबकि विधायक आरिफ मसूद ने मध्य विधानसभा में चल रहे कार्यों का ब्यौरा मांगा।

सांसद आलोक शर्मा ने नगर निगम, स्मार्ट सिटी, पीडब्ल्यूडी एवं जल कार्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शहरभर में सड़कों की खुदाई से आम नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है। विकास योजनाएं बनाते समय स्थानीय जनप्रतिनिधियों की राय अवश्य ली जाए। उन्होंने अल्पना तिराहे पर नाला निर्माण में हो रही देरी पर भी नाराजगी व्यक्त की।
स्मार्ट सिटी परियोजना पर जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
बैठक में स्मार्ट सिटी परियोजना भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कई भवन तो बना दिए गए, लेकिन उनमें मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने दशहरा मैदान के विकास कार्यों पर भी सवाल उठाए तथा सुझाव दिया कि बड़े व्यावसायिक प्लॉटों को छोटे आकार में विभाजित किया जाए ताकि उनकी बिक्री बढ़ सके।
महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का भी समय पर समाधान नहीं हो पाता। इस पर सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने सभी कार्यों के बेहतर समन्वय के लिए एक नोडल एजेंसी गठित करने का सुझाव दिया। कलेक्टर प्रियंका मिश्रा ने कहा कि इस विषय पर अलग से बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा कर समाधान कराया जाएगा।
भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव पारित
दिशा समिति की बैठक में भोपाल के जल स्रोतों के संरक्षण के लिए भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण गठित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। सांसद आलोक शर्मा ने प्रस्ताव रखा कि प्राधिकरण की अध्यक्षता संभागायुक्त करें तथा इसमें भोपाल एवं सीहोर के कलेक्टर, संबंधित विधायक, महापौर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को सदस्य बनाया जाए।
सांसद ने कहा कि भोपाल की पहचान उसके विशाल तालाबों और समृद्ध आर्द्रभूमि (वेटलैंड) से है। इसलिए भोपाल को ‘वेटलैंड सिटी’ घोषित करने के लिए भी जिला समिति के माध्यम से राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

