अयोध्या संवाददाता अरविंद कुमार की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं (चोरी) के विवाद के बाद सामने आया है।
क्यों दिया चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के दान में हेराफेरी और चोरी का मामला सामने आने के बाद से ही ट्रस्ट और उसके पदाधिकारी विवादों के घेरे में थे। पूर्व विधायक पवन पांडे के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी, जिसमें कई लोगों को नामजद किया गया है।
नैतिक जिम्मेदारी ली: हालांकि चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है, लेकिन मंदिर प्रबंधन और चढ़ावे की देखरेख की मुख्य जिम्मेदारी इन्हीं के पास थी।
26 जून को ही सौंप दिया था इस्तीफा: विवाद बढ़ने पर दोनों पदाधिकारियों ने 26 जून को ही अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसे सोमवार (6 जुलाई) को हुई ट्रस्ट की आपातकालीन बैठक में स्वीकार कर लिया गया।
ट्रस्ट के नियमों का हवाला: ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के मुताबिक, कोई भी इस्तीफा सौंपे जाने के साथ ही स्वीकार मान लिया जाता है। चंपत राय इस बात से बेहद दुखी थे कि उनके रहते ऐसा माहौल बना, इसलिए उन्होंने जांच पूरी होने और दोषियों को सजा मिलने तक पद पर न रहने का फैसला किया।
चंपत राय के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है, ट्रस्ट की बैठक में सर्वसम्मति से कृष्ण मोहन को चंपत राय की जगह अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है।
कृष्ण मोहन भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले हैं। अब आगे का सारा कामकाज उन्हीं की देखरेख में संभाला जाएगा।
बैठक की मुख्य बातें और ट्रस्ट का पक्ष
“हम सब इस घटना से बेहद आहत और दुखी हैं। चोरी छोटी थी या बड़ी, यह अलग बात है, लेकिन ऐसा माहौल यहां बना, इसका हमें बेहद अफसोस है।”
स्वामी गोविंद देव गिरी, कोषाध्यक्ष (राम मंदिर ट्रस्ट)
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने अफवाहों पर विराम लगाते हुए साफ किया कि मंदिर में दान की गई बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।
दान की वस्तुएं सुरक्षित: सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उड़ रही अफवाहों को खारिज करने के लिए ट्रस्ट ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोने की रामायण, भगवान राम के चरण चिह्न, और कागभुसुंडि की मूर्ति जैसी चीजों को मीडिया के सामने प्रदर्शित किया।
ट्रस्ट ने साफ किया कि दान में मिली सभी 2,800 मूल्यवान वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज है और एक भी चीज गायब नहीं हुई है।
इस हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने की, जिसमें देश के कई बड़े संत और अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी भी शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के गृह सचिव संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस बैठक का हिस्सा बने। ट्रस्ट की अगली बड़ी बैठक अब 22 जुलाई को होने जा रही है, जिसमें आगे की प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अंतिम मुहर लगेगी।

