सलधा/ बेमेतरा/ छत्तीसगढ़ – जिला के ग्राम सलधा जहां सवा लाख शिवलिंग का ऐतिहासिक मंदिर बन रहा है वहीं उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का दिव्य भव्य चातुर्मास चल रहा है। सर्व प्रथम समस्त ग्रामवासी कंदई और महिला ब्राह्मण समाज कवर्धा के द्वारा पादुका पूजन किया गया। दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने सलधा शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नाम की घोषणा की। अप्रमेय स्वामी जी ने विरुदावली का वाचन किया। परम पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि श्री हनुमान जी महाराज भगवान श्री राम जी के प्रिय भक्त हैं। रामायण में कई प्रकार के भक्त हैं हनुमान जी ने भगवान से कहा कि आत्म बुद्धि से हम दोनों एक हैं याने हनुमान जी महाराज भगवान की आत्मा हैं हर व्यक्ति अपनी आत्मा को ही प्रेम करता है। बृहदारण्यक उपनिषद में आया कि हमें पति पत्नी माता पिता बच्चों से प्रेम करते हैं वो अपने लिए अपने लाभ और सुख के लिए इनसे प्रेम करते हैं। हम पत्नी से पत्नी के लिए प्रेम नहीं करते हम पत्नी से अपने सुख के लिए प्रेम करते हैं। अर्थात हर व्यक्ति अपने आप से ही प्रेम करता है। हनुमान जी ज्ञानी भक्त हैं राम मय हैं हनुमान जी महाराज, भगवान के आत्म स्वरूप हैं इसलिए हनुमान जी सबसे अधिक प्रिय भक्त हैं। सेवक और शिष्यों को अपने स्वामी और गुरु के मुख को देखना चाहिए जिससे उनके मुख के भाव को देख कर जान सकें कि स्वामी को क्या चाहिए और स्वामी के बिना बोले उनकी आवश्यकता जानकर सेवा कर दे वो उत्तम सेवक है। बोलने पर तुरंत कर दे वो मध्यम सेवक है और जो कई बार बोलने पर करे तो वो अधम सेवक है। एक बार भगवान श्री राम जी के दरबार में भगवान के भाईयों ने माता सीता से कहकर सबने सेवा आपस में बांट ली और हनुमान जी को कोई सेवा नहीं दी तब हनुमान जी ने सेवा सूची देखी और कहा कि जब भगवान को जंमहाई आयेगी तो मैं चुटकी बजाऊंगा सबने हां कर दी अब हर समय हनुमान जी सामने रहने लगे और रात में जब हनुमान जी विश्राम कक्ष से बाहर कर दिया गया तब हनुमान जी महाराज लगातार चुटकी बजाने लगे भगवान श्री राम जी को लगातार जंमहाई आने लगी तब गुरु वशिष्ठ जी आये और समझ गये और कहा कि अब हनुमान जी को कोई भी भगवान की सेवा से नहीं रोकेगा। एक बार भगवान श्री राम और माता सीता जी सभी को उपहार दे रहे थे हनुमान जी को माता सीता जी के द्वारा एक बहुत सुंदर मोती की माला पहनाई गई जिसे हनुमान जी दांतों से तोड़कर देखकर फेंकने लगे तब हनुमान जी पूंछने पर बताते हैं कि इस मनके में राम नहीं है जिसमें राम नहीं वो मेरे काम का नहीं। लोगों ने कहा कि जिस छाती में ये माला है क्या वहां राम जी हैं ? तब हनुमान जी ने अपनी छाती चीर कर दिखा दी वहां सीता जी और लक्ष्मण जी सहित भगवान श्री राम जी के दर्शन हुए। प्रभु राम जी ने हृदय से लगा लिया। एक बार शनिदेव दिग्विजयी बनने के लिए हनुमान जी से लड़ें जब हनुमान जी ने मारा तो पराजित हो गए कहा छोड़ दो मैं आपके भक्तों को कभी भी नहीं सताऊंगा तब हनुमान जी ने छोड़ दिया। शनिदेव ने कहा कि मुझे थोड़ा तेल दीजिए जिसे घाव में लगा लूं तब हनुमान जी ने दया करते कहा कि जब लोग मुझमें तेल लगायेंगे तो आप लगा लेना। एक बार लोगों ने पूछा कि हनुमान जी आपमें इतना बल कहां से आया तब हनुमानजी बोले कि मेरी माता जी से सब माता अंजना के पास गये और पूंछा कि आपके दूध में बहुत बल है ऐसा हनुमान जी बताते हैं वही जानने हम आये हैं तब माता अंजना ने अपने पयोधर को थोड़ा दबाया और दूध की धारा सामने के पहाड़ पर पड़ी और पहाड़ दो खण्डों में टूट कर गिर गया। साजा विधायक ईश्वर साहु जी ने परम पूज्य शंकराचार्य जी से आशीर्वाद लिया।
गुजरात से आए किशोरी दवे शास्त्री और विदुषी गार्गी पंडित जी ने अपने भाव प्रगट किए, कलाकारों ने भजन और नृत्य प्रस्तुत किया।
परम पूज्य शंकराचार्य जी प्रतिदिन 5 बार पूजन करते हैं सुबह 4.30 , 6.45, 9.45, 4.45 और शाम को 6.45 बजे। सुबह 8 से 9.30 वेदांत पाठ होता है दोपहर को 2.30 से सत्संग प्रवचन होता है।
इस अवसर पर दंडी स्वामी उमेश आश्रम जी महाराज, सुरेंद्र आश्रम जी महाराज, वासुदेवाश्रम जी महाराज, छोटे आश्रम जी महाराज, शिवाश्रम जी महाराज, रामाश्रम जी महाराज, श्रीमज्ज्योतिर्मायनंद: सरस्वती जी महाराज, स्वामी श्री अप्रयय शिवसदातकृतानंद गिरी जी महाराज, ब्रह्मचारी शारदानंद, शंकर स्वरूप, प्रभु प्रभुतानंद, शंभु प्रेमानंद, ईश्वरानन्द, वैष्णवानंद, साधु सर्व शरण, आदि अनंतानन्द, बाबा धार्त धार्यानंद, मुक्तानंद, साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदाम्बा, आनंद उपधाध्य, रत्ना देवी उपाध्याय, रवि शास्त्री, प्रवीण गर्ग, अनुराग शर्मा, सनोज, संतोष मंडल, गौतम जैन, बलराम साहू, अश्वनी साहू, वेद पाठी विद्यार्थीगण, पुरुषोत्तम पटेल, घनश्याम आदिवासी, महेंद्र चौहान, राजेश वैष्णव सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बहुत अधिक संख्या में भक्तों के द्वारा प्रवचन का लाभ लिया गया। सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर आरती की।

