सलधा/बेमेतरा – जिला के ग्राम सलधा जहां सवा लाख शिवलिंग का ऐतिहासिक मंदिर बन रहा है वहीं उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज का दिव्य भव्य चातुर्मास चल रहा है। सर्व प्रथम समस्त ग्रामवासी ताकम (ब्राह्मण पारा) के द्वारा पादुका पूजन किया गया। दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने सलधा शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नाम की घोषणा की। अप्रमेय स्वामी जी ने विरुदावली का वाचन किया। परम पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि भगवान् श्री गणेश की उपासना सारा संसार करता है।
भगवान् श्री वेद व्यास जी ने महाभारत की रचना मन में की ब्रह्मा जी को सुनाया ब्रह्मा जी ने बहुत प्रसंशा की श्री व्यास जी ने कहा इसे लिखना है लेखक चाहिए तब ब्रह्माजी ने कहा श्री गणेश जी लिखेंगे भगवान श्री गणेश जी से प्रार्थना की गई उन्होंने कहा कि इसमें लोक कल्याण है क्या तब भगवान व्यास जी ने कहा कि हां लोक कल्याण है। चिंतामणि गणेश जी तैयार हो गए व्यास जी से कहा कि यदि हम लिखेंगे तो शर्त ये है कि हम रुकेंगे नहीं लगातार लिखेंगे। व्यास जी ने कहा कि आप श्लोकों के अर्थ को समझकर लिखेंगे। महाभारत लिखते लिखते एक बार ऐसा समय आया कि लेखनी टूट गई तब श्री गणेश जी ने अपने एक दांत को तोड़कर लिखना प्रारंभ किया। महाभारत में क ई कूट श्लोक लिखे गए हैं। सनातन धर्म महाभारत लेखन के लिए भगवान श्री गणेश जी का सदैव ऋणी रहेगा। “भगवान श्री गणेश सर्व सुलभ और करुणा के सागर हैं। उनकी पूजा-अर्चना में जाति, वर्ण या लिंग का कोई भेदभाव नहीं है।”
श्री गणेश जी की महिमा का वर्णन करते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि सनातन परंपरा में गणपति जी की उपासना सभी के लिए समान रूप से खुली है। समाज का प्रत्येक वर्ग और हर वर्ण का व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ उनकी आराधना कर सकता है। इसमें किसी भी प्रकार का कोई भेद या प्रतिबंध नहीं है। स्त्रियों के पूजाधिकार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि माताएं और बहनें भी पूर्ण अधिकार एवं भक्तिभाव के साथ श्री गणेश जी की पूजा-अर्चना और व्रत कर सकती हैं। भगवान गणेश अपने भक्तों की निष्कपट भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर उनके जीवन से विघ्नों का हरण करते हैं।
गणेश जन्म की पावन कथा के संदर्भ में शंकराचार्य जी ने बताया कि श्री गणेश के प्राकट्य की कथा केवल सुनने मात्र से मनुष्य के जीवन में मंगल, शुभता और रिद्धि-सिद्धि का आगमन होता है। जो भी श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक इस कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन के समस्त अमंगल दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पूर्व विधायक पंडरिया मोतीराम चंद्रवशी जी ने कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य जी प्रारंभ से ही सनातन धर्म की रक्षा कर रहे हैं आपके प्रयासों से श्री राम सेतु की रक्षा हुई, गंगा को राष्ट्र नदी का दर्जा मिला, अयोध्या धाम में श्री राम मंदिर बना, कवर्धा में भगवा ध्वज कांड में गांव गांव भगवा ध्वज फहराया गया और कवर्धा में ऐतिहासिक लोग एकत्रित हुए भगवा ध्वजारोहण में।
इस अवसर पर दंडी स्वामी उमेश आश्रम जी महाराज, सुरेंद्र आश्रम जी महाराज, वासुदेवाश्रम जी महाराज, छोटे आश्रम जी महाराज, शिवाश्रम जी महाराज, रामाश्रम जी महाराज, श्रीमज्ज्योतिर्मायनंद: सरस्वती जी महाराज, स्वामी श्री अप्रयय शिवसदातकृतानंद गिरी जी महाराज, ब्रह्मचारी शारदानंद, शंकर स्वरूप, प्रभु प्रभुतानंद, शंभु प्रेमानंद, ईश्वरानन्द, वैष्णवानंद, साधु सर्व शरण, आदि अनंतानन्द, बाबा धार्त धार्यानंद, मुक्तानंद, साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदाम्बा, आनंद उपधाध्य, रत्ना देवी उपाध्याय, रवि शास्त्री, प्रवीण गर्ग, अनुराग शर्मा, सनोज, संतोष मंडल, गौतम जैन, बलराम साहू, अश्वनी साहू, वेद पाठी विद्यार्थीगण, पुरुषोत्तम पटेल, घनश्याम आदिवासी, महेंद्र चौहान, राजेश वैष्णव सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।

