सलधा – बेमेतरा जिला के ग्राम सलधा जहां सवा लाख शिवलिंग का ऐतिहासिक मंदिर बन रहा है वहीं उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का दिव्य भव्य चातुर्मास चल रहा है। सर्व प्रथम समस्त ग्रामवासी कातलबोड़ के द्वारा पादुका पूजन किया गया। दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने सलधा शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नाम की घोषणा की। पं आनंद जी ने विरुदावली का वाचन किया। परम पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि भगवान् के अवतारों की चर्चा कर रहे हैं भगवान के अवतार अनंत हैं कुछ लोगों ने गिनने का प्रयास किया आकाश के तारे, धरती के कण और जल की बूंदें कम पड़ जायेंगी शिव जी के अवतारों को गिनने के लिए। अनंत अवतार और चरित्र हैं। व्यक्ति अपने शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार भगवान शिव जी के अवतारों और लीलाओं का गान करते हैं भगवान अपनी शक्ति के अनुसार फल देते हैं। एक बार भैरव जी को द्वारपाल बना कर इच्छानुसार विहार के लिए गये और शक्ति पार्वती उन्मत्त अवस्था में बाहर आने लगी तब भैरव जी ने माता को रोक दिया। माता ने कहा कि तुम मुझे नारी समझते हो इसलिए मनुष्य हो जाओ तब भैरव जी धरती पर वैताल बन कर आये भगवान भैरव और अलौकिक लीलाएं की। भगवान् भी महेश और शारदा के रूप में आये। सबसे पहले पंच ब्रह्म के रूप में अवतार लिये सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान और ब्रह्मा जी को सृष्टि आदि कार्य का ज्ञान दिया। अष्ट मूर्ति अवतार हुआ पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश आदि इसी से संसार बना है इसलिए सारा संसार शिवमय है संसार के रूप में शिव ही दिखाई दे रहे हैं। संसार के सभी लोगों से प्यार करो किसी से भी नफरत और द्वेष मत करो इससे भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। यदि तुमने किसी भी संसार के प्राणियों का अपमान, घृणा, नफरत या तिरस्कार करते हैं तो हम भगवान शिव का ही अपमान करते हैं और शिव जी हमसे नाराज हो जाते हैं। ब्रह्मा जी सृष्टि विस्तार के लिए शिव जी से प्रार्थना करते हैं तब शिव जी ने अपने शरीर में ही शिवा को प्रगट किया शिव पार्वती हो गये। उसके बाद उनका दर्शन कर के ब्रह्मा जी ने स्त्री पुरुष की रचना की और मैथुनी सृष्टि प्रारंभ हुई। भगवान् शिव जी का शरभ अवतार हुआ जब हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को कई प्रकार से कष्ट दिया और मारने का प्रयास किया तब भगवान नृसिंह का अवतार हुआ देवताओं ने स्तुति की प्रह्लाद जी को हृदय से लगाया हृदय ठंडा हुआ पर मस्तिष्क में क्रोध बना हुआ था तब भगवान शिव जी शरभ अवतार हुआ और नृसिंह को लेकर दूर चले गए और दोनों में युद्ध हुआ शिव जी ने उनके क्रोध को शांत किया और विष्णु जी के कहने पर नृसिंह और शरभ दोनों एक दूसरे में समा गये जो नृसिंह अवतार का चमड़ा बचा उसे बाघंबर के रूप में पहनते हैं और नृसिंह के मुण्ड को अपने मुण्ड माला में सुमेरु के रूप में स्वीकार किया। जो इसे सुनता है वो संकटों से मुक्त हो कर सुख प्राप्त करता है।
मध्यप्रदेश के पूर्व विधानसभा नर्मदा प्रसाद प्रजापति जी ने कहा कि सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा आ कर मन बहुत प्रसन्न हो गया ऐतिहासिक मंदिर बन रहा है आप गौमाता की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़े हैं जब आप पत्रकार के कुतर्कों का उदाहरण सहित जबाब देते हैं तो उससे कुतर्की निरुत्तर हो जाते हैं और सनातन धर्म का स्वरूप स्पष्ट प्रकाशित होता है। हम लोगों के ऊपर भी सदैव कृपा बनाए रखियेगा। महेंद्रानंद जी अमरकंटक ने कहा कि यहां सवा लाख शिवलिंग विराजमान होंगे तो यह कैलाश के समान हो जायेगा।
इस अवसर पर दंडी स्वामी उमेश आश्रम जी महाराज, सुरेंद्र आश्रम जी महाराज, वासुदेवाश्रम जी महाराज, छोटे आश्रम जी महाराज, शिवाश्रम जी महाराज, रामाश्रम जी महाराज, श्रीमज्ज्योतिर्मायनंद: सरस्वती जी महाराज, स्वामी श्री अप्रयय शिवसदातकृतानंद गिरी जी महाराज, ब्रह्मचारी शारदानंद, शंकर स्वरूप, प्रभु प्रभुतानंद, शंभु प्रेमानंद, ईश्वरानन्द, वैष्णवानंद, साधु सर्व शरण, आदि अनंतानन्द, बाबा धार्त धार्यानंद, मुक्तानंद, साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदाम्बा, आनंद उपधाध्य, रत्ना देवी उपाध्याय, रवि शास्त्री, प्रवीण गर्ग, अनुराग शर्मा, सनोज, संतोष मंडल, गौतम जैन, बलराम साहू, अश्वनी साहू, वेद पाठी विद्यार्थीगण, पुरुषोत्तम पटेल, घनश्याम आदिवासी, महेंद्र चौहान, राजेश वैष्णव सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कलाकारों ने भजन और नृत्य प्रस्तुत किया।
परम पूज्य शंकराचार्य जी प्रतिदिन 5 बार पूजन करते हैं सुबह 4.30 , 6.45, 9.45, 4.45 और शाम को 6.45 बजे। सुबह 8 से 9.30 वेदांत पाठ होता है दोपहर को 2.30 से सत्संग प्रवचन होता है।
बहुत अधिक संख्या में भक्तों के द्वारा प्रवचन का लाभ लिया गया। सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर आरती की।
