सलधा/बेमेतरा/ छत्तीसगढ़- जिला के ग्राम सलधा जहां सवा लाख शिवलिंग का ऐतिहासिक मंदिर बन रहा है वहीं उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का दिव्य भव्य चातुर्मास चल रहा है। सर्व प्रथम समस्त ग्रामवासी सेमरिया के द्वारा पादुका पूजन किया गया। दण्डी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने सलधा शिवलिंग स्थापित करने वाले भक्तों के नाम की घोषणा की। अप्रमेय स्वामी जी ने विरुदावली का वाचन किया। परम पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि कल आपने सुना कि भगवान श्री शिव जी नंदी के रूप में आये वृषभ और नंदी दो रुप हैं सभी वृषभ नंदी नहीं होते पर सभी नंदी वृषभ हैं। नंदयत इति नंदी जो हमें आनंदित करे वो नंदी हैं। हम लोग केई जगह आनंद खोजते हैं। पर समको धर्म से सुख मिलता है। इसलिए नंदी कौन हैं धर्म हैं नंदी। नंदी धर्म स्वरूप हैं। विद्या से विनय, नीति आती है और उससे पात्रता फिर धन और धन से धर्म और धर्म से सुख मिलता है। राजस तामस और सात्विक तीन प्रकार का सुख मिलता है। आज चतुरंगिणी सेना के सर्वाधिकारी किशोर दवे जी और चतुरंगिणी सेना के द्वारा तलवार से स्वागत किया गया है। इस देश में गौ माता को पशु कहा जा रहा है और उनकी हत्या की जा रही है। पैसे के लिए गौमांस का निर्यात किया जा रहा है। हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि गौमाता को राष्ट्र माता और राज्य माता का सम्मान मिले और पूर्ण रूप से गौ हत्या बंद हो। हमारे मांग करने पर भी यदि गौ हत्या बंद नहीं हुई तो हम हमारी गौमाता की रक्षा हर हाल में करेंगे जरुरत पड़ी तो हम अपनी माता की रक्षा के लिए तलवार भी उठायेंगे और गौ हत्यारों का सिर काट देंगे, यदि गौमाता की रक्षा करते हमारा सिर कट जाये तो हम गौमाता की रक्षा करते मरना बलिदान होना अच्छा समझेंगे।
आज संध्या कालीन पूजन में ब्रह्म कमल अर्चन किया गया।
धर्मालंकार डाक्टर पवन कुमार मिश्र जी कवर्धा
गुजरात से आए किशोरी दवे शास्त्री और विदुषी गार्गी पंडित जी ने अपने भाव प्रगट किए।
कलाकारों ने भजन और नृत्य प्रस्तुत किया।
परम पूज्य शंकराचार्य जी प्रतिदिन 5 बार पूजन करते हैं सुबह 4.30 , 6.45, 9.45, 4.45 और शाम को 6.45 बजे। सुबह 8 से 9.30 वेदांत पाठ होता है दोपहर को 2.30 से सत्संग प्रवचन होता है।
इस अवसर पर दंडी स्वामी उमेश आश्रम जी महाराज, सुरेंद्र आश्रम जी महाराज, वासुदेवाश्रम जी महाराज, छोटे आश्रम जी महाराज, शिवाश्रम जी महाराज, रामाश्रम जी महाराज, श्रीमज्ज्योतिर्मायनंद: सरस्वती जी महाराज, स्वामी श्री अप्रयय शिवसदातकृतानंद गिरी जी महाराज, ब्रह्मचारी शारदानंद, शंकर स्वरूप, प्रभु प्रभुतानंद, शंभु प्रेमानंद, ईश्वरानन्द, वैष्णवानंद, साधु सर्व शरण, आदि अनंतानन्द, बाबा धार्त धार्यानंद, मुक्तानंद, साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदाम्बा, आनंद उपधाध्य, रत्ना देवी उपाध्याय, रवि शास्त्री, प्रवीण गर्ग, अनुराग शर्मा, सनोज, संतोष मंडल, गौतम जैन, बलराम साहू, अश्वनी साहू, वेद पाठी विद्यार्थीगण, पुरुषोत्तम पटेल, घनश्याम आदिवासी, महेंद्र चौहान, राजेश वैष्णव सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बहुत अधिक संख्या में भक्तों के द्वारा प्रवचन का लाभ लिया गया। सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर आरती की।
