चंडीगढ़.
पीजीआई में बीते वर्ष हुए प्राइवेट ग्रांट सेल घोटाले की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। 1.14 करोड़ रुपये के इस घोटाले में सीबीआई अगले माह तक चार्जशीट दायर करने जा रही है। जांच में छह कर्मचारियों समेत आठ लोगों के नाम सामने आए हैं। इस मामले में दिसंबर 2025 में एफआईआर दर्ज हुई थी।
कई दिनों से सीबीआई की टीम पीजीआई के अधिकारियों समेत स्टाफ से पूछताछ कर रही है। अब तक की जांच में सामने आया था कि पीजीआई के गोल चौक स्थित फोटोस्टेट की दुकान चलाने वाला दुर्लभ अपने पार्टनर साहिल सूद के साथ मिलकर प्राइवेट ग्रांट सेल के अधिकारियों से सांठगांठ कर इस घोटाले को अंजाम दिया था। प्राइवेट ग्रांट सेल के तहत गरीब और जरूरतमंद मरीजों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को फर्जी दस्तावेजों के जरिए दुर्लभ, साहिल और उनके रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया जाता था जिसे बाद में आपस में बांट लिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में मृत मरीजों के नाम पर भी ग्रांट ली गई।
ये हैं आरोपित –
- रिटायर्ड जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट धर्मचंद
- मेडिकल रिकाॅर्ड क्लर्क सुनील कुमार
- लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) प्रदीप सिंह
- लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) चेतन गुप्ता
- हाॅस्पिटल अटेंडेंट नेहा और
- प्राइवेट ग्रांट सेल कर्मचारी गगनप्रीत
- फोटोस्टेट की दुकान चलाने वाला दुर्लभ और पार्टनर साहिल सूद
इन घोटाला का भी मास्टरमाइंड था दुर्लभ कुमार
सीबीआई जांच में सामने आया था कि आरोपित दुर्लभ कुमार केवल प्राइवेट ग्रांट घोटाले तक सीमित नहीं था, बल्कि आयुष्मान भारत और हिमकेयर योजनाओं में हुए घोटालों का भी वही मास्टरमाइंड रहा है। इससे पहले चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच करोड़ों के घोटाले में उसे गिरफ्तार कर चुकी थी, इसके बावजूद वह लंबे समय तक पीजीआइ में घपले करता रहा।
क्या है पीजीआई प्राइवेट ग्रांट सेल
पीजीआई का प्राइवेट ग्रांट सेल निजी कंपनियों, संस्थाओं और अन्य संगठनों से मिलने वाले पैसों से जुड़े काम देखता है। इन पैसों का इस्तेमाल अस्पताल में होने वाले मेडिकल रिसर्च, नई तकनीक विकसित करने और गरीब, जरूरतमंद मरीजों के इलाज से जुड़े कार्यों में किया जाता है। इसके साथ ही यह सेल मिलने वाली आर्थिक मदद और उसके इस्तेमाल से जुड़े कामों का हिसाब रखता है।
